भाषा / Language
Edited version of my old poem
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Edited version of my old poem ...
यहाँ कुछ टिकता क्यों नहीं?
टिकती नहीं सफलता,
पाते ही बढ़ जाती ,
और पाने की मानसिकता
टिकता नहीं विश्वास,
दोनों में से एक ,
कोई दगाबाज़
टिकता नहीं भाईचारा,
इत्तू सा मेरा ,
तेरा क्यों है इतना सारा ?
टिकती नहीं मुहब्बत ,
असमंजस में ...
रिश्ता अपनाऊ या दौलत ?
टिकता नहीं वादा,
स्वार्थी फितरत ,
जरूरत से ज्यादा
टिकती नहीं नज़र ,
है आज झुकी ,
कल दिखे ऊंचा प्रहर
टिकती नहीं घडी की सुइयाँ ,
एक लाये गम,
दूसरी देती खुशियाँ
टिकती नहीं दोस्ती ,
जल जाती ...होते ही,
यार की उन्नति
टिकती नहीं मुस्कान ,
होठ पर धरता कम ,
छीनता ज्यादा इंसान
टिकता नहीं रिश्ता ,
समय संग पक जाता ,
उम्र संग झड जाता
टिकती नहीं जवानी
चढ़ती सूरज की तरह,
सूखती जैसे मरू में पानी
टिकते नहीं आंसू,
बहते ख़ुशी में और
तब भी , जब मैं उदास हूँ
टिकती नहीं दौलत ,
आज दिखे बेशुमार ,
जाने कब पलटे किस्मत
टिकती नहीं जीत ,
विजयी आज तू ,
कल कहीं और हो संगीत
टिकती नहीं हार,
हूँ अभी पस्त लाचार ,
कल करूं संभल कर वार
टिकती नहीं यादें ,
परत दर परत बिछ जाती ,
कब तक इसको लादें?
टिकती नहीं आदत ,
नयी लगते ही,
पुरानी की हो सहादत
टिकता नहीं ईमान ,
है बहुत सस्ता ,
खरीदता -बेचता इंसान
टिकती नहीं जुबान ,
फिसल -फिसल कर
बची कहाँ इसकी पहचान?
टिकती नहीं प्रार्थना,
आज इस लिए ,कल उस लिए ,
भगवन् बदल बदल याचना
टिकते नहीं जज़्बात ,
प्रेम नहीं, आवश्यकता वश
निभाते एक दूजे का साथ
टिकती नहीं शर्म ,
थी आँखों में ,अब है भी ?
होता इसका भ्रम
टिकती नहीं इच्छा ,
दिमाग माने ...अच्छा ,
दिल मांगे ...और अच्छा
टिकता नहीं वजूद ,
जीवन भर कायम ,
मृतक का ,नहीं कही मौजूद
और भी कई चीजें हैं जो टिकती नहीं ,
मेरी सोच और कलम भी टिकती नहीं ,
क्या आपको भी ऐसा सब लगता नहीं ,
आस पास ऐसा सब दिखता नहीं?
इसी लिए तो कहती हूँ
यहाँ कुछ टिकता नहीं
टिकता है, तो रुकता नहीं !
(चाह कर भी रचना की लम्बाई कम नहीं कर पायी ) क्षमा.....😀😃😃😃😃😃
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें