भाषा / Language
"स्वच्छता" को अपने व्यक्तित्व का
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"स्वच्छता" को अपने व्यक्तित्व का
हिस्सा बनायें
आज का ,कल का नहीं ,हर दिन का
किस्सा बनायें
अपनी नज़रों को स्वच्छता का
आदी बनायें
साफ़ सुन्दर वातावरण "हक़"
बुनियादी बनायें
तुझसे-मुझसे ,इससे-उससे,
अकेले कहाँ होगा ?
मिलेंगे हाथ ,बढ़ेंगे प्रयास
ना हुआ आज,कल यक़ीनन होगा
"सफाई में है भलाई "आज से
नारा हुआ
साफ़-सुन्दर प्रांगण ,नया लक्ष
हमारा हुआ
"स्वच्छ सोच "हम
अपनाने वाले हैं
शायद ऐसे ही "अच्छे दिन "
आने वाले हैं
इस खुबसूरत पहल को
मेरा सलाम है
आपके हर प्रयास को
मेरा प्रणाम है
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें