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रचना 0063

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"स्वच्छता" को अपने व्यक्तित्व का

"स्वच्छता" को अपने व्यक्तित्व का हिस्सा बनायें आज का ,कल का नहीं ,हर दिन का किस्सा बनायें अपनी नज़रों को स्वच्छता का आदी बनायें साफ़ सुन्दर वातावरण "हक़" बुनियादी बनायें तुझसे-मुझसे ,इससे-उससे, अकेले कहाँ होगा ? मिलेंगे हाथ ,बढ़ेंगे प्रयास ना हुआ आज,कल यक़ीनन होगा "सफाई में है भलाई "आज से नारा हुआ साफ़-सुन्दर प्रांगण ,नया लक्ष हमारा हुआ "स्वच्छ सोच "हम अपनाने वाले हैं शायद ऐसे ही "अच्छे दिन " आने वाले हैं इस खुबसूरत पहल को मेरा सलाम है आपके हर प्रयास को मेरा प्रणाम है
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें