कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 0002

भाषा / Language

उस तक मेरा कुछ पहुँचता नहीं

उस तक मेरा कुछ पहुँचता नहीं …................. दिल की धडकनों में उसका पता ढूंढना चाहती हूँ, पर वो इसमें बसता नहीं शब्दों से नहीं , इशारों से समझना चाहती हूँ, पर वो कुछ कहता ही नहीं ं हँसते -हँसते उसके साथ रोना चाहती हूँ,पर वो मुस्कुराता तक नहीं कभी साथ, कभी पीछे उसके चलना चाहती हूँ,पर वो साथ चलता नहीं बहते आंसूओं को थामना चाहती हूँ ,पर वो भीगता ही नहीं होठों की मुस्कान उस पर धरना चाहती हूँ,पर वो मशरूफ है कहीं आवाज़ देकर पास बुलाना चाहती हूँ ,पर उसकी आवाज़ लौटती नहीं स्नेह भरे स्पर्श से दूरियाँ मिटाना चाहती हूँ ,पर वो बहुत दूर है कहीं दिल के आईने में उसकी तस्वीर देखना चाहती हूँ,पर वो वहां है ही नहीं इंतज़ार में आँखें बिछाना चाहती हूँ,पर वो इस राह का मुसाफिर नहीं अपने वादों में शामिल करना चाहती हूँ,पर उसे कोई वादा याद नहीं उसकी तस्वीर से बात करना चाहती हूँ ,पर वो भी चुप्पी साधे है अभी कंधे में सर रख ,दो पल यूं ही बैठना चाहती हूँ,पर वो एक पल भी मेरा नहीं एक नहीं , अपने सभी राज़ खोलना चाहती हूँ ,पर वो इसके लिए राज़ी नहीं रूमानी बारिश में भीगना चाहती हूँ ,पर मुझ पर बरसना उसकी फितरत नहीं अपनी खुशबू से उसे बहकाना चाहती हूँ,पर वो कभी भटकता नहीं आसमान छूना चाहती हूँ ,पर उसके पंखों में मेरे लिए परवाज़ नहीं छोटी -छोटी खुशियाँ समेटना चाहती हूँ पर वो मेरी ख़ुशी में शामिल नहीं दोस्त नहीं ,हमसफ़र मानना चाहती हूँ,पर उसको मेरी कोई खलिश नहीं , ज़िन्दगी की हर जंग मिल कर लड़ना चाहती हूँ,पर वो इसके लिए तैयार नही वक्त ही नहीं ,उम्र गुज़ारना चाहती हूँ,पर उसका साया तक यहाँ से गुज़रता नहीं हरदम कुछ देना और कभी कभी कुछ पाना चाहती हूँ, पर अब हमारा ऐसा रिश्ता नहीं चाहते चाहते ज़िन्दगी में आगे निकल आये हैं सारी चाहतें पीछे दूर कहीं छोड़ आये हैं बरसों बाद आज भी वो नहीं है मेरे करीब लेकिन आज वो किसी का, और मैं किसी और का हैं बुलंद नसीब
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें