कल्पनाशब्दों के बीच
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फूल पर तितली बैठाना क्या मुश्किल है

फूल पर तितली बैठाना क्या मुश्किल है.... तुझे सोचना है बस जरा सा मुस्कुराना है। *मेरा रेगिस्तान शब्दों सा है .... मलहम भी ....... मरीचिका भी
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें