भाषा / Language
उसने मुझे सिखाया कि एक *शुक्रिया* कह देने भर से उम्मीद लौट…
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उसने मुझे सिखाया कि एक *शुक्रिया* कह देने भर से उम्मीद लौट आती है ....
मरे मन की
*मिलते ही उसने कहा ...तुम्हारी हँसी
मैंने कहा ....तुम्हारी आँखें
नमी पसंद रूहें ...
फिर कुछ नहीं बोली
सिवा *शुक्रिया* के।
*तस्वीर मेरी favourite है 😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें