कल्पनाशब्दों के बीच
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रोज़ रोज़ पुर्जों में लिखा हुआ प्रेम एक दिन खूबसूरत किताब हो…

रोज़ रोज़ पुर्जों में लिखा हुआ प्रेम एक दिन खूबसूरत किताब हो जाता है । दो शिक्षक जब साथ मुस्कुराए... आपको मिलना और जानना सुखद रहा... Kalyan Mankoti ji आपकी पहाड़ के बच्चों के प्रति स्नेह और उनको राह दिखाने की सोच के लिए नतमस्तक हूं। आपसे बहुत कुछ सीखने का मन है। अल्मोड़ा लिटरेचर फेस्ट में आपसे मिलना मेरा हासिल रहा। साथ बनाए रखूंगी। वादा रहा।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें