कल्पनाशब्दों के बीच
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भव्या हमेशा एक बात कहती है ....यार मां मैं जो सबसे ज्यादा r…

भव्या हमेशा एक बात कहती है ....यार मां मैं जो सबसे ज्यादा regret करती हूं वो ये कि मैं दक्ष को अपने साथ ग्रो करते नहीं देख पाई....उसकी शैतानियां और मस्ती मिस हो गई मेरी। आज कल जी भर लाड़ चल रहा। सारी फरमाइशें पूरी की जा रही। जूते,t shirt और खाने की शौकीन दक्षु की लॉटरी लग गई है। सारे राज़ पोलपट्टी खुल रहे दोनों के। बातें हैं जो खत्म नहीं होती। सच है बेटियां घर में रौनक ला देती हैं।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें