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तुम्हारी खुश्बू पहन लेती हूँ

तुम्हारी खुश्बू पहन लेती हूँ तन्हाई का गुमां नही रहता । *हेडफोन पर ये गीत बज रहा और मैं गुम हूं खुद में कहीं।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें