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कविता लिख कर नहीं

कविता लिख कर नहीं .... हो कर रो कर बो कर खो कर आती है। *पेड़ कितना सक्षम कवि है ... हर नए पुराने फूल को बस प्रेम कविता सिखाता है। प्रतिद्वंदिता नहीं।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें