भाषा / Language
ऐसे न मुझे तुम देखो
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ऐसे न मुझे तुम देखो....
वो मुझे फूल, पत्तों , तितली, चिड़िया ,पहाड़ों में ढूंढती रहती है ।
मैं भी उसे आंखों में छिपा कर रखता हूँ...
प्रकृति बची रहती है हमारे बीच
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें