भाषा / Language
मेरी पहली कविता..... ठीक आज के दिन दस बरस पहले लिखी।
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मेरी पहली कविता..... ठीक आज के दिन दस बरस पहले लिखी।
फिर बस लिखती रही।
क्या खोया क्या पाया कभी नहीं सोचा...
बस लिखा
किसके लिए?
मुझे भी पता नहीं ।
मन की कही।
मन में रही।
मेरे लिए लिखना अब बस इतना भर है कि छू आती हूं ... उनको जिनको मैं चाहूं।
या उनको जो मुझे समझ पाएं।
लिख कर मुस्कान आती है।
लिखना मुझे रूह होना सिखाता है ।
लिखने से इश्क़ हुआ है।
इससे कभी मन नहीं भरता.... न थकान होती है।
*आप सब का दिल से शुक्रिया जो आप सब मेरे सफ़र में मेरे साथ बने हुए हैं।
आपके समय का शुक्रिया।
आपका मन तो सुंदर है ही।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें