भाषा / Language
जानते हो दुःख की दो दिशाएं है
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जानते हो दुःख की दो दिशाएं है..
घोर दुःख ...ठीक सामने ----सबका दिया हुआ
घनघोर दुःख .....ठीक ऊपर....उसका दिया हुआ
तीसरा दुःख प्रेम है पर उसकी कोई दिशा नहीं ।वो अपने आप में दिशा है।
*जो दुःख कम करना चाहो उसी दिशा में हाथ बढ़ाओ .....
प्रेम का दुःख अलग है ...उसे मीठा सुख कहती हूँ मैं....मेरा हासिल ।
शुभदिन....
अच्छे रहना💐
कह दिया करो मन .....कहना अच्छा है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें