कल्पनाशब्दों के बीच
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Full stop

Full stop..... बरसों प्रतीक्षा के बाद मिलने पर ... उसने कहा बहुत बोलती हो.. चुप रहा करो। Practice pause. Just pause. और वो चला गया। उस रात ...वो बहुत चीखी रो रोकर कहा ...ईश्वर उसे मन से निकाल दो। उसे जाने दो मुझसे। मेरी आवाज़ उसके लिए चली जाए। अगले रोज़ उसे लगा वो अक्षरों में गठान लगाना भूल गई है। आवाज़ देना भी याद नहीं रहा। प्रेम खनक नहीं रहा ।उसे कोई आवाज सुनाई नहीं दे रही। वो डूब गई । She starts with pause now a days and goes no where. He is still practicing silence. Long silence . Full stop.
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें