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तुम तक लौटूंगी नहीं अब

*तुम तक लौटूंगी नहीं अब .... पर किसी रोज आऊंगी तुमसे मिलने। प्रेम में मेरे पास बस इतनी आश्वस्ति है तुम को देने के लिए.... *बैरिया* सदा रहेगी! *शाम तक सुबह की नजरों से उतर जाते हैं....
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें