कल्पनाशब्दों के बीच
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मैंने दिल से कहा....ढूंढ लाना खुशी।

*मैंने दिल से कहा....ढूंढ लाना खुशी। अक्सर हम उसके कोई नहीं लगते जो हमारा सब कुछ लगता है। उसी तरह हम उसके होते हैं जो हमारा कोई नहीं होता। इस जादू को समझने में देर लगती है पर जब समझ आता है तो लगने और होने का अंतर समझ आ जाता है। तुम लगते रहना । मैं होती रहूंगी। फासले फैसले बदल देते हैं। *नासमझ लाया गम तो...गम ही सही।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें