कल्पनाशब्दों के बीच
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कहानी और कविता के बीच एक प्रेमिका ढूंढना

कहानी और कविता के बीच एक प्रेमिका ढूंढना .... दिग्भर्मित होने जैसा है। कहानी कांधे पर सर रखकर दूर तक मुझको थामे रखती है। कविता बांहों में भर कर कहती है आओ बस अभी मर जाएं। प्रेमी दो बार नहीं मर सकता क्या? हर बार जी नहीं सकता अगर। समर्पण का कोई चेहरा थोड़े ही होता है। कागज़ कविता को बस जगह देता है....थोड़ी सी वही तुम भी मुझे दे दो... थोड़ी सी जगह
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें