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रचना 4321

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तुम मेरा खाली दर्पण हो

तुम मेरा खाली दर्पण हो ... जितना मैं तुम्हारी हूं तुम भी उतना ही मेरे हो। बस तुम।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें