कल्पनाशब्दों के बीच
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और दुखना नहीं चाहती थी

और दुखना नहीं चाहती थी ... प्रेम निषेध के आगे टिक लगा दिया। कमी के नाम पर मेरे पास तीन मनके कम हैं। देखो अभी तुम्हें अपना नाम लिखा दिखाई दिया होगा। *कल्पना की अधिकता को भी कमी कहा जा सकता है। तुम अब वस्तु हो गए हो। मेरा चाहना रोक नहीं सकते। तुमको अपने लिए मूक कर दिया है। पर मैं करती रहूंगी प्रेम.... अपनी किस्म का *U are released but I am not slashed out.
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें