कल्पनाशब्दों के बीच
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@ कल्पना लाइव मेरी किताब २०१९ में आई थी। जब कभी किसी आभासी…

@ कल्पना लाइव मेरी किताब २०१९ में आई थी। जब कभी किसी आभासी दोस्त को fb से इतर मिलती हूं तो यही उपहार देती हूं। कई दोस्तों को अभी भेजनी बाकी है। ये बस मन भर लिखने वाली बात थी। पहली किताब सबको बहुत प्रिय होती है। कुछ रोज़ पहले Gaurav Sharma जी स्कूल मिलने आए थे। उन्होंने किताब पर स्नेह भेजा है। यहां paste कर रही .. 'कल्पना लाइव ' स्त्री मन की सलवटों से बहती विशुद्ध कविताओ का संग्रह है। कविताएँ ऐसी है जैसे भावनाओं ने क्रांति कर दी हो और स्मृति ने शब्दों का पिटारा खोल दिया हो। कविताएँ किसी मुखर स्त्री-मन की गंगोत्री से निकली और उनके प्रवाह में बहने से कुछ ना बचा। आशा, निराशा, अपेक्षा, उपेक्षा, आकांक्षा सब बह निकला। कविताएँ कैसी भी हों, अप्सराएं होती हैं किंतु जब कविता में शब्दों के अस्तित्व न्याय पा जाएं तो कविता देवी बन जाती है। कल्पना जी की कविताओें में विनम्रता है, निश्चलता है, स्वाभिमान है, शालीनता है और ईमानदारी है। कविताओेंं में गहनता है जो पुनः पुनः पढ़ने पर बढ़ती जाती है। ' पहाड़ पर उग आने वाली रातें ' , ' अबोला प्रेम ', ' नदी सा कर दे ', ' पीले पड़ते रिश्ते ', ' काश ', ' शब्द और प्रेम ' , 'लाल दुःख ' और ' देव ' मुझे विशेष रूप से प्रभावित कर गई। ' कल्पना लाइव ' की कविताएँ एक स्त्री की आडम्बरहीन स्वीकारोक्ति है कि वह जीवन से, स्वयं से और अपने प्रेमी से क्या अपेक्षाएँ रखती है। उन्नहत्तर देवी तुल्य पवित्र कविताओं को पढने का सुअवसर देने के लिए कल्पना पांडेय जी का हृदय से आभार। आशा है अगला संग्रह शीघ्र पढ़ने को मिलेगा। *बहुत आभार आपका।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें