कल्पनाशब्दों के बीच
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आज सुबह अर्द्ध एकांत के कुछ पन्नों पर मन लिखा।नरेश जी किता…

आज सुबह अर्द्ध एकांत के कुछ पन्नों पर मन लिखा।नरेश जी किताब सुंदर है। कुछ दिन संग संग चलेगी। फिर मेरी लाइब्रेरी में जगह पा जायेगी। जो मन किया तुम्हारी कविताओं पर लिख दिया। तुम्हें बहुत आगे जाना है। अभी बहुत सारा लिखना है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें