कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 4261

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इस बात को किस तरह से कहूं ... कि मैं जा ही नहीं सकती तुमको…

इस बात को किस तरह से कहूं ... कि मैं जा ही नहीं सकती तुमको छोड़ कर । मैं वहीं फ्रीज हो गई हूं ... तुम्हारे पास । पड़ा रहने दीजिए। शुक्रिया। * इक तू ही यार मेरा गीत सुनते हुए आया ख्याल।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें