कल्पनाशब्दों के बीच
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मासूमियत

मासूमियत.... आज दूसरी क्लास के गौरव का जन्मदिन है।स्कूल में आज कल परीक्षा चल रही। अपना काम खत्म करने के बाद गौरव मेरे कमरे में टॉफी देने आया और फिर औरों को देने चला गया। कुछ देर बाद मैं रिसेप्शन एरिया के पास से गुजरी तो देखा कि सरस्वती माता के सामने दो टॉफी रखी हुई हैं। मुझे ये टॉफी जानी पहचानी लगी। मैंने रिसेप्शन पर बैठी अपनी सहेली से पूछा तो बोली कि एक छोटा बच्चा सबको टॉफी देने आया था वही सरस्वती माता जी के सामने रख गया है। मुझे इस बात पर गौरव पर इतना प्यार आगया कि क्या बताऊं... ऐसा होता हुआ मैंने आज पहली बार देखा। रोज़ ही बच्चे जन्मदिन मनाते हैं ... देने का मन देखिए बच्चे का.... ईश्वर को भी शामिल कर लिया अपनी खुशी में। संस्कार और संवेदना दो बेहद प्यारे शब्द हैं। घर और विद्यालय में पोषण पाते हैं। गौरव को स्नेह ... आशीष मेरे चेहरे पर मुस्कान ला दी।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें