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"धूप का पंख" ला दो

"धूप का पंख" ला दो उदासी झलनी है । * किसी प्रिय को ये न कह पाना कि हम फिर मिलेंगे... सबसे बड़ा दुख है। उसे जाते हुए न देख पाना उससे भी बड़ा घात।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें