भाषा / Language
आंखों में तेरी रेत की नदी है।
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आंखों में तेरी रेत की नदी है।
मेरा देखना तुम नहीं देख सकते.....
मुझे देखते हुए देखना अलग बात है।
*हमेशा कहती हूँ प्रेम पेंसिल से लिखो....
मिटा मिटा कर लिखो
सुथरा रखो मन
दिखा क्या जो मैं देख रही ☺️☺️
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें