कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 4239

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आंखों में तेरी रेत की नदी है।

आंखों में तेरी रेत की नदी है। मेरा देखना तुम नहीं देख सकते..... मुझे देखते हुए देखना अलग बात है। *हमेशा कहती हूँ प्रेम पेंसिल से लिखो.... मिटा मिटा कर लिखो सुथरा रखो मन दिखा क्या जो मैं देख रही ☺️☺️
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें