कल्पनाशब्दों के बीच
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मन डोंगी है

मन डोंगी है.... बिन पाल बिन पतवार अभी इस पल तो बिन जल भी कंपास तुम्हारी तस्वीर देख रहा सुइयां मुझमें गड़ गई हैं। शुभ रात
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें