ककल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 4232

भाषा / Language

मन डोंगी है

✦
मन डोंगी है.... बिन पाल बिन पतवार अभी इस पल तो बिन जल भी कंपास तुम्हारी तस्वीर देख रहा सुइयां मुझमें गड़ गई हैं। शुभ रात
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें