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रचना 4226

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तुमने बार बार हर बार कहा ...सांस भी न लेना और ज़िंदा भी रहना ।

तुमने बार बार हर बार कहा ...सांस भी न लेना और ज़िंदा भी रहना । मैं अक्सर इस बात पर उदास हो जाती थी । अब जब सोचती हूं तो लगता है तुम कितने सुलझे ढंग से कहा करते थे ... मैं प्रेम में हूं तुम्हारे तुम भी रहना । शुभ रात
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें