कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 4203

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तुम्हारी तो धूप ही हूँ

तुम्हारी तो धूप ही हूँ .... आज तो love u कल्पना मत कहो ☺️☺️☺️ जिसने साल भर मनाया हो जश्ने इश्क... वो इक रोज़ ही रक्स क्यों करे ? *प्रेम मुबारक आप सभी को । 💕 दिन उसके लिए बीते जो मन का हो।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें