भाषा / Language
तुम जहां कहीं हो
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तुम जहां कहीं हो
मैं ठीक उसी राह में कहीं बैठ गई हूं।
यहीं मिलूंगी।
तुम्हारी प्रतीक्षा मेरे आसपास से रोज गुजरती है।
मेरी मुस्कान देख कर चौंकती है ।
फिर मेरा माथा चूम कर कहती है
आएगा आएगा 💕
*पहाड़ी सीढ़ी पर प्रतीक्षा बैठी है।
तुम ना जाने कहां हो।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें