कल्पनाशब्दों के बीच
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ज़िंदगी धूप ... तुम घना साया

ज़िंदगी धूप ... तुम घना साया तुम्हारा *अक्सर* रख रही। अपना *अमूमन* भेज रही। रख लो .... एक ही बहर के दो प्रेम शब्द हमारे *तस्वीरें अभी बच्चों की छुट्टी होने पर ली हैं। राम्या तुम कितनी प्यारी हो।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें