भाषा / Language
गम को नुमाईश में रख कर क्या करेंगे
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*गम को नुमाईश में रख कर क्या करेंगे?
इधर खरीददार ही हँसी के आते हैं।
*तुम भी होते तो अच्छा था.....
इससे उदास और क्या लिखती?
* इश्क का इतर है ... उड़ते उड़ते उड़ जायेगा एक रोज़
अभी तो तुम मेरी आधी दोपहर आधी सांझ रख लो ।
*याद का कांटा है ... लग गया है
उदासी टपकेगी... जानती थी
तेरे नाम की हरारत बनी रहे
बस इस लिए लिपट जाती हूं ...
कभी तुमसे
कभी खुद से
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें