कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 4106

भाषा / Language

उसने कहा प्रेम हो जाओ

उसने कहा प्रेम हो जाओ मैं हो गई उसने कहा चुप हो जाओ मैं हो गई उसने कहा खो जाओ मैं खो गई एक रोज़ उसने कहा ...जाओ मैंने कहा...कहां ? बस उसी पल पानी से आंच और रेत से खुशबू उठी मैं बुझ गई। वो भी कहां बचा ।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें