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रचना 4103

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ये कितना सुखद है कि आप का लिखा महक जाए

ये कितना सुखद है कि आप का लिखा महक जाए... और ये कितना दुखद है कि आप का नाम ही पोंछ दिया जाय। आपको श्रेय न दिया जाए। कुछ दिन पहले मैसूर कोर्स में सुविचार पढ़ना था....गूगल किया तो इमेजेस में ये दिखाई दिया। मुझे अपनी सी खुशबू आई। हैरानी भी हुई। अभी गूगल किया तो ये सब उभर आया। I liked the way it is used.... नाम का क्या है ... वो तो एक रोज़ गुम जाएगा।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें