कल्पनाशब्दों के बीच
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दिसंबर बहुत है मेरे पास

दिसंबर बहुत है मेरे पास ... तुम बस साल भर की धूप बने रहो । हमेशा की तरह...
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें