कल्पनाशब्दों के बीच
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हम मंदिर में ईश्वर को नहीं ईश्वरीय छाप को लेने जाते हैं ।

हम मंदिर में ईश्वर को नहीं ईश्वरीय छाप को लेने जाते हैं । ठीक जैसे मैं तुम में तुम मुझ में
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें