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रचना 4011

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हथेलियां इसलिए भी नर्मोनाजुक होती हैं कि पैदाइशी मुलाजम होत…

*हथेलियां इसलिए भी नर्मोनाजुक होती हैं कि पैदाइशी मुलाजम होती हैं। जानती हैं न सख्त ....न सख्ती ... कोई काम नहीं आता। *जिंदगी को थपेड़े लाचारी ही मारती है। चपत तो उम्मीद लगाती है। *बादशाहत एक दिन की सही ... मुझे इश्क पर इश्क से ज्यादा यकीन है। सलाम जरूर करूंगी। *सुंदर तस्वीर कल्पना जोशी ने इनबॉक्स में भेजी है। जल्द फ्रेम करवाऊंगी
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें