भाषा / Language
हथेलियां इसलिए भी नर्मोनाजुक होती हैं कि पैदाइशी मुलाजम होत…
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*हथेलियां इसलिए भी नर्मोनाजुक होती हैं कि पैदाइशी मुलाजम होती हैं।
जानती हैं न सख्त ....न सख्ती ...
कोई काम नहीं आता।
*जिंदगी को थपेड़े लाचारी ही मारती है।
चपत तो उम्मीद लगाती है।
*बादशाहत एक दिन की सही ...
मुझे इश्क पर इश्क से ज्यादा यकीन है।
सलाम जरूर करूंगी।
*सुंदर तस्वीर कल्पना जोशी ने इनबॉक्स में भेजी है। जल्द फ्रेम करवाऊंगी
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें