कल्पनाशब्दों के बीच
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प्रेम का सबसे नायाब पड़ाव है अकेलापन।

प्रेम का सबसे नायाब पड़ाव है अकेलापन। वर्तमान और भविष्य के बीच के बावन पत्ते फेंकने ,फेंटने और फेरने का वक़्त। जीत और हार के बीचों बीच का शाश्वत *रेत,पानी,आसमान,पहाड़, और तुम। मुझे और क्या चाहिए 😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें