भाषा / Language
प्रेम का सबसे नायाब पड़ाव है अकेलापन।
✦
प्रेम का सबसे नायाब पड़ाव है अकेलापन।
वर्तमान और भविष्य के बीच के बावन पत्ते फेंकने ,फेंटने और फेरने का वक़्त।
जीत और हार के बीचों बीच का शाश्वत
*रेत,पानी,आसमान,पहाड़, और
तुम।
मुझे और क्या चाहिए 😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें