भाषा / Language
प्यास अगर बार बार कुँए के पास जाए तो कुआँ भी सूख जाता है।
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*प्यास अगर बार बार कुँए के पास जाए तो कुआँ भी सूख जाता है।
मैं धूप में चमकती रेत के प्रेम में पड़ गई ।दूर से पानी लगती थी। मैं दौड़ कर अक्सर प्यास बुझा लेती ।
धीरे धीरे प्यास कम हो गई पर उस चमकती रेत में पानी देखने की लत लग गई। दौड़ना जारी रहा।
मैं एक ही भुलावे से सैकड़ों बार प्रेम करती रही ।
बनती रही
बिगड़ती रही।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें