ककल्पनाशब्दों के बीच
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अतीत और वर्तमान के बीच

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अतीत और वर्तमान के बीच .... बहुत से वर्षों का खामोश सूनापन जमा होता जाता है । इस काई को "याद" कहतें हैं । *तुमको लिखती हूं..... सच है पर तुम्हारे लिए नहीं लिखती....ये उससे भी बड़ा सच है। इस भ्रम की जितनी भी सतरें खोलोगे खुश्बू आयेगी ... कभी मेरी ...कभी मेरी मासूम जिद्द की तुम प्रेम में पड़ जाओगे मेरे।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें