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जीवन इतने भर में बीत रहा कि एक रोज़ तुमसे मिलकर कहें

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जीवन इतने भर में बीत रहा कि एक रोज़ तुमसे मिलकर कहें .... ईश्वर बहुत शुक्रिया । इस फेर बड़ी देर बाद सुन सके मेरा मन । अब दिखाई दे ही दिए हो तो ....रहकर भी जाना मुझमें। *दिल्ली वापसी हो रही। हेडफोन पर जादू सा कुछ बज रहा ....प्यार भरे दो शर्मीले नैन.... याद का तीर है... कभी उथला कभी गहरे धंसता जाता है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें