कल्पनाशब्दों के बीच
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प्रेम दो जनों के बीच अपनी अपनी पारी टिक कर खेलने का खूबसूरत…

*प्रेम दो जनों के बीच अपनी अपनी पारी टिक कर खेलने का खूबसूरत हुनर है....ऐसा मैं कहती हूं। सफ़र में ये किताब साथ है... *बातें बेवजह* इस किताब का हर पन्ना खूबसूरत है । पढ़ते वक्त लगा किस पंक्ति को रेखांकित करूं और किस को न करूं। किताब अभी कोरी छोड़ दी है ।मन अभी और कई बार करेगा पढ़ने को .... ये जान रही हूं मैं। कुछ किताबें आसपास रखी रहें तो सुकून रहता है। मेरा बुकमार्क एक मोरपंख रहता है हमेशा से। किताब पढ़ने के बाद लगा कि मेरा मोरपंख और मखमली हो गया। उसे वहीं किताब के आखरी पन्ने पर रख दिया है। सुंदर आवरण और उससे भी सुंदर शब्दों की जादूगरी अहा.... *मन अगर कभी उदासी और प्रेम में गोता खाने को करे तो इस किताब को पढ़ लें....आप तर जायेंगे। किशोर जी को पढ़ना एक यात्रा है.... अनंत अद्भुत यात्रा। आप लौट ही नहीं सकते वहां से .....जहां तक वो अपने साथ ले जाते हैं। * सुंदर तस्वीरें मेरे आंगन से.... उससे भी खूबसूरत किताब की
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें