भाषा / Language
डायरी लिखना लगभग छोड़ ही दिया है। जो ख्याल आते हैं उसी समय…
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डायरी लिखना लगभग छोड़ ही दिया है। जो ख्याल आते हैं उसी समय यहीं पोस्ट कर देती हूं । कुछ सहेजती नहीं ।
अब मन बना है कि लिखा सहेजना चाहिए। किसी रोज़ मन हुआ तो एक किताब बन जाए शायद । मन बना रहना चाहिए। ईश्वर रहना तुम।
आज बहुत दिनों बाद कलम से लिखा मन ।फोन पर नहीं। सुकून मिला।
Unedited version of me
मेरे लिखे को समय देने का बहुत शुक्रिया। रहना आप सब।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें