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मैंने प्रेम से बहुत पहले प्रार्थना सीखी

मैंने प्रेम से बहुत पहले प्रार्थना सीखी फिर जाना कि हर प्रार्थना में तुम्हारा होना ही प्रेम है। अब ये मानती हूं कि तुम प्रार्थना हो और मैं प्रेम ईश्वर हमें मिलाकर ही ईश्वर रह पाएगा। उसको प्रेम और प्रार्थना का प्रति उत्तर देना ही होगा। तीन हस्ताक्षर होंगे मेरे तुम्हारे और ईश्वर के *शरद पूर्णिमा मुबारक
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें