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फिर पश्मीने का मौसम आया है

फिर पश्मीने का मौसम आया है फिर ऊनी शर्ट पहनी है आंखों से ऊन के गोले लुढ़क रहे अधरों पर कोसा एक नाम सेंक दे रहा। *बारिश में ... सर्दियों ने दस्तक दी है। इस फेर की सर्दी मुबारक रहे।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें