कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 3912

भाषा / Language

यकीं से गुमां का

यकीं से गुमां का गुमां से यकीं का सफ़र हो तुम मुस्कुराते रहना। शुभरात
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें