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प्रेम नहीं लौटा सकते तो उसके भरम भी न लौटाइये😊

प्रेम नहीं लौटा सकते तो उसके भरम भी न लौटाइये😊 अगर आप किसी को उसका प्रेम लौटा नहीं सकते तो यकीनन उसे आपको दुगनी इज़्ज़त से नवाजना चाहिए। आपकी तरफ रोज़ कोई यूं ही थोड़े ही बढ़ा चला आता होगा। बोझ बढ़ता है तो उतार देना कहाँ गलत है। कहना क्यूँ गलत है। मैं अगर तुमको प्रेम करती हूँ तो तुमसे मिल कर तुम्हीं को तो तुम्हें लौटाने आती हूँ। मुझमें तुम बहुत सारा जम गए हो। मैं कम बची रह गई हूं। तुम्हारा ही हिस्सा तुम तक देने आती हूँ। इसमें गुनाह क्या है? ना और हां के बीच की गीली गुजारिशें हैं.... खुदाई छोड़िए। बस साथ रहा कीजिये। तुम तो रहोगे ...मेरे 💐 यकीनन
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें