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आदरणीय Gaurav Sharma जी ने बड़े प्रेम से ये किताब भेजी। दो…

आदरणीय Gaurav Sharma जी ने बड़े प्रेम से ये किताब भेजी। दोस्त जब किताब भेजते हैं तो लगता किसी ने तो इतनी बड़ी दुनिया में याद किया। हिचकी लगाई। किताब बेहद सुंदर और सार्थक बातों से बुनी हुई है। जीवन गुड़ भी है और चना भी। चलाना ही पड़ेगा। तन उड़ने से पहले जी भर मन उड़ाते रहना है। हारना मना है। ऐसी ही प्यारी संवेदनाओं से भरी किताब के लिए आपको शुक्रिया। नई ऊर्जा से ओत प्रोत हो गई। अनंत शुभकामनाएं और आभार आपका। *समीक्षा लिखना नहीं आता। मन रखना आता है। जगह जगह रख दिया है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें