कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 3879

भाषा / Language

आज कई सालों बाद गणपति जी की स्थापना की है अपने घर पर।

आज कई सालों बाद गणपति जी की स्थापना की है अपने घर पर। गजानन पधारे हैं। पता नहीं सुबह मन से आवाज़ आई। सो मन की सुन ली। आप सब पर ईश कृपा बनी रहे। गणपति बप्पा मोरया....
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें