कल्पनाशब्दों के बीच
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सुख के पीछे दुख और दुख के पीछे सुख आता ही है।

सुख के पीछे दुख और दुख के पीछे सुख आता ही है। आज वैभव लक्ष्मी कथा पढ़ते हुए ये पंक्ति पर मन ठिठक गया। सोचा जैसे... प्रेम के पीछे प्रेम और प्रेम के पीछे प्रेम आता ही है। अपनी ही सोच पर हंसी आ गई। आप सब पर ईश्वर कृपा बनी रहे। शुभ रात।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें