कल्पनाशब्दों के बीच
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एकांतिक रहना भी एक हुनर है।

एकांतिक रहना भी एक हुनर है। कमाल अपने आप में होते रहते हैं ।बस उनको दिशा देनी होती है। अपना ज़िक्र खुद से करना सनक है। पर बहुत प्यारी चुहल भी। मुझे बेहद पसंद है।कीजिये बतकही खुद से। संवरिये। रख कर देखिए कुछ पल खुद को अपनी ही हथेली पर और चूम लीजिये। मुकम्मल नज़र आएंगे। 😊😊😊😊 तुम्हारे अलावा जो बेशकीमती मेरा मेरे पास है वो मैं खुद हूं।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें