कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 3826

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मैं घुप्प चुप्पी में लीन सौंदर्य हूँ।

मैं घुप्प चुप्पी में लीन सौंदर्य हूँ। मुंदी आंखों से स्वप्न देखना चाहती हूं।तुमको मेरी आँख में चुभना होगा। एक तिनका होना होगा। और फूंक भी। निर्बाध मैं फिर बहकर अश्रु से तुम्हारा नाम लिखूँगी प्रेम के कोलाहल पर ऐसी कई चिठ्ठियों को लिख लिख कर हवा में उड़ा रखा है।जाने कहाँ कौन सी तुम्हारे हाथ लग जाये। तुमको देखती हूँ तो लगता है.... खुद को लिख कर खुद ही मिटा कर देखते रहना चाहिए। *ना * सुनने की आदत बनी रहती है। *मेरी सबसे पसंदीदा जगह? तुम्हारे संग संवाद में होना होना... फिर खो जाना। शुभ रात...
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें